राष्ट्र मानव, राष्ट्र महामानव, राष्ट्र सिद्ध मानव – इन्हीं विचारों पर आधारित नैतिक मूल्यों का आम जन को परिचय कराना।

हमारे बारे में

रानी लक्ष्मीबाई केसरिया माधव संस्थान की स्थापना माननीय श्री विनोद द्विवेदी जी ने ३ अप्रैल २०२५ को क्रांतिकारी भूमि कानपुर, उप्र० में की।श्री विनोद द्विवेदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय प्रथम सभा विभिन्न प्रांतों के गणमान्य पदाधिकारियों के साथ १३ जून २०२५ को पवित्र बसुंधरा वृन्दावन मथुरा, उप्र० में संपन्न हुई। संस्था राष्ट्रव्यापी, राष्ट्र प्रेरित,सनातन धर्म से जुड़ें विचारों पर आलंबित होकर कार्य संपादित कर रही है।

संस्था भारत के 22 राज्यों में अपना योगदान जनमानस तक पहुँचाने में सफल रही है। आगामी 2 वर्षों में पूरे देश भर के जनमानस को प्रेरित करने में अपना योगदान प्रदान करेगी। रानी लक्ष्मीबाई केसरिया माधव संस्था, कानपुर उ०प्र० का उद्देश्य बहुत ही प्रेरणादायक है। राष्ट्रहित से प्रेरित होकर, श्री विनोद कुमार द्विवेदी इस नेतृत्व को आगे बढ़ाएँगे। समाज में आत्मनिर्भरता, शिक्षा एवं सामाजिक बंधु भाव का निर्माण कराना।

समृद्ध मानव – समृद्ध समाज – समृद्ध राष्ट्र”

यह संकल्पना केवल घोषवाक्य नहीं, एक जागृति का दीप है। इतिहास में तेजस्वी आदर्श – झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का शौर्य, राजमाता अहिल्याबाई होल्कर जी का सामाजिक एवं सांस्कृतिक कर्तव्यनिष्ठा, छत्रपति शिवाजी महाराज की मानवीय नीति सिद्धांत संग भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद आदि के बलिदान का योगदान, एवं संतों के मानव जीवन दर्शन से मानव समाज को दिशा प्रदान करना – पूरे भारतवर्ष संग विश्व जगत को विकसित करने में अनमोल स्तंभ सिद्ध होगा।

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सनातन धर्म से जुड़ें विचारों पर आलंबित होकर कार्य संपादित करना।

हमारे कार्यक्रम

हम कई क्षेत्रों में कार्य करते हैं ताकि समुदायों में स्थायी सकारात्मक प्रभाव डाला जा सके।

शिक्षा के लिए दान

मदद और दान देकर भारत के साथ काम करना

संस्था राष्ट्रव्यापी, राष्ट्र प्रेरित,सनातन धर्म से जुड़ें विचारों पर आलंबित होकर कार्य संपादित कर रही है।

पदाधिकारी

श्री विनोद कुमार द्विवेदी

राष्ट्रीय अध्यक्ष/संस्थापक

श्री माधव तुकाराम खेडेकर

राष्ट्रीय महासचिव

श्री अनिल मिश्रा

राष्ट्रीय विधिक सलाहकार

श्रीमंत प्रभाकर नरसिंहराव भट्ट

वर्तमान पेशवा,चित्रकूट राजघराना
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वीडियो गैलरी

हमारे कार्यक्रमों की विशेष झलकियाँ
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संस्था के लिए महानुभावो का संदेश

हमारे ब्लॉग

नाना साहेब पेशवा

(19 मई 1824 – 24 सितम्बर 1859) सन 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शिल्पकार थे। उनका मूल नाम 'धोंडूपंत' था। स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहेब ने कानपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध नेतृत्व किया।

तात्या टोपे

(16 फरवरी 1814—18 अप्रैल 1859] भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के एक प्रमुख सेनानायक थे। सन 1857 के महान विद्रोह में उनकी भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण, प्रेरणादायक और बेजोड़ थी।

सेनापति झलकारी बाई

(22 नवंबर 1830 - 4 अप्रैल 1857) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं